Saturday, May 31, 2014

आज का श्लोक, ’सन्न्यासयोगयुक्तात्मा’ /’ sannyāsayogayuktātmā’

आज का श्लोक,
’सन्न्यासयोगयुक्तात्मा’ /  ’sannyāsayogayuktātmā’ 
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’सन्न्यासयोगयुक्तात्मा’ /  ’sannyāsayogayuktātmā’ - जिस योग के अभ्यास में समस्त कर्म मुझ (अपनी) आत्मा-रूपी परब्रह्म परमेश्वर में अर्पित कर दिए जाते हैं, उसमें संलग्न होनेवाला मनुष्य,


अध्याय 9, श्लोक 28,

शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः ।
सन्न्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि ॥
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(शुभ-अशुभफलैः एवम् मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः ।
सन्न्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तः माम् उपैष्यसि ॥)
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भावार्थ : इस प्रकार, सन्न्यासयोग से संपन्न तुम शुभ एवं अशुभरूप सारे कर्मों तथा उनके फलों रूपी बन्धनों से छूटकर मुझको ही प्राप्त हो जाओगे ।
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’सन्न्यासयोगयुक्तात्मा’ /  ’sannyāsayogayuktātmā’ -- One who has dedicated all his actions of each and every kind to Lord (Me, as said in the last śloka 27 of this Chapter).

Chapter 9, śloka 28,

śubhāśubhaphalairevaṃ
mokṣyase karmabandhanaiḥ |
sannyāsayogayuktātmā 
vimukto māmupaiṣyasi ||
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(śubha-aśubhaphalaiḥ evam
mokṣyase karmabandhanaiḥ |
sannyāsayogayuktātmā 
vimuktaḥ mām upaiṣyasi ||)
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Meaning :
In this way having dedicated all your actions to ME, by this sannyāsayoga, you will become free from all your good and evil actions and their fruits also, and attain ME only.
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