Sunday, October 5, 2014

आज का श्लोक, ’योगेश्वर’ / ’yogeśvara’

आज का श्लोक, ’योगेश्वर’ / ’yogeśvara’ 
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’योगेश्वर’ / ’yogeśvara’ - हे योगेश्वर, हे योगिराज,

अध्याय 11, श्लोक 4,

मन्यसे यदि तच्छक्यं मयाद्र्ष्टुमिति प्रभो ।
योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ।
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(मन्यसे यदि तत् शक्यम् मया द्रष्टुम् इति प्रभो ।
योगेश्वर ततः मे त्वम् दर्शय आत्मानम् अव्ययम् ॥)
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भावार्थ :
हे प्रभु (कृष्ण)! यदि आप यह मानते हैं कि आपका वह अपना अव्यय स्वरूप देख पाना मेरे लिए संभव है तो हे योगेश्वर ! कृपया मुझे उसके दर्शन कराइये ।
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’योगेश्वर’ / ’yogeśvara’ - O Lord of Yoga (śrīkṛṣṇa)!

Chapter 11, śloka 4,

manyase yadi tacchakyaṃ 
mayādrṣṭumiti prabho |
yogeśvara tato me tvaṃ 
darśayātmānamavyayam |
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(manyase yadi tat śakyam 
mayā draṣṭum iti prabho |
yogeśvara tataḥ me tvam 
darśaya ātmānam avyayam ||)
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Meaning :
O Lord (kṛṣṇa)! If You think for me that I could possibly see Your That Eternal form, kindly show me O yogeśvara ( Lord of yoga) ! 
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