Thursday, October 2, 2014

आज का श्लोक, ’योनिषु’ / ’yoniṣu’

आज का श्लोक, ’योनिषु’ / ’yoniṣu’
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’योनिषु’ / ’yoniṣu’ - योनियों में,

अध्याय 16, श्लोक 19,

तानहं द्विषतः क्रूरान्संसारेषु नराधमान् ।
क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्चैव योनिषु
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(तान् अहम् द्विषतः क्रूरान् संसारेषु नराधमान् ।
क्षिपामि अजस्रम् अशुभान् आसुरीषि एव योनिषु ॥)
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भावार्थ :
जैसा श्लोक 8 में कहा गया है, आसुरी सम्पदा / प्रकृति से युक्त मनुष्य मानते हैं कि इस जगत् की कोई नियामक चेतन-सत्ता (ईश्वर) नहीं है, जिससे जगत् अस्तित्व में आता हो । .... उस नियामक सत्ता (ईश्वर) से विद्वेष रखनेवाले अधम पापकर्म में रत क्रूर मनुष्यों को मैं (उनकी अपनी आत्मा, ईश्वर ही) संसार में बारम्बार आसुरी योनियों का ही जन्म देता हूँ ।
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’योनिषु’ / ’yoniṣu’ - into the wombs,

Chapter 16, śloka 19,

tānahaṃ dviṣataḥ krūrān-
saṃsāreṣu narādhamān |
kṣipāmyajasramaśubhā-
nāsurīṣcaiva yoniṣu ||
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(tān aham dviṣataḥ krūrān
saṃsāreṣu narādhamān |
kṣipāmi ajasram aśubhān
āsurīṣi eva yoniṣu ||)
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Meaning :
Those sinners with āsurīṣī evil tendecies, with cruel minds, who hate the authority of Divine Cosmic Intelligence Principle that controls and regulates the whole existence, -Me, are thrown perpetually into the demonic wombs repeatedly, and they keep on suffering.
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