Wednesday, February 5, 2014

आज का श्लोक / 'हन्युः' / 'hanyuH'

आज का श्लोक / 'हन्युः' / 'hanyuH'
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अध्याय 1, श्लोक 46,
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यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः ।
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत् ॥
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(यदि माम् -अप्रतीकारम्-अशस्त्रं शस्त्रपाणयः ।
धार्तराष्ट्रा: रणे हन्युः तन्मे क्षेमतरं भवेत् ॥)
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'हन्युः' / 'hanyuH' - 'हन्' = मारना,  विधिलिङ्,प्रथम पुरुष, बहुवचन , 'वे मार डालें' अर्थ में ।
भावार्थ:
यदि मुझ निहत्थे पर धृतराष्ट्र के पुत्र शस्त्र लेकर आक्रमण करें और वे मुझे मार  डालें , तो यह तो और भी अच्छा होगा ।
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Chapter 1, shloka 46,
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'हन्युः' / 'hanyuH',
yadi mAmapratIkAra-
mashastraM shastrapANayaH |
dhArtarAShTrA raNe hanyuH
tanme kShemataraM bhavet ||
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It will be even far better, if the weapon-wielding sons of dhRtarAShTra kill me, while I am unarmed and not resisting.
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