Friday, March 21, 2014

आज का श्लोक, ’सैन्यस्य’ / 'sainyasya'

आज का श्लोक,  ’सैन्यस्य’ / 'sainyasya'
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’सैन्यस्य’ / 'sainyasya' - सेना के,

अध्याय  1, श्लोक 7,

अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम ।
नायका मम सैन्यस्य सञ्ज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ॥
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(अस्माकम् तु विशिष्टाः ये तान् निबोध द्विजोत्तम ।
नायकाः मम सैन्यस्य सञ्ज्ञार्थम् तान् ब्रवीमि ते ॥)

भावार्थ :
हे द्विजश्रेष्ठ! इस युद्ध में हमारे पक्ष में सम्मिलित हुए मेरी सेना के जो भी प्रधान (योद्धा) हैं, आपकी जानकारी के लिए अब मैं उनके बारे में आपसे कहूँगा ।
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’सैन्यस्य’ / 'sainyasya' - in the army,

Chapter 1, shloka 7,

asmAkaM tu vishiShTA ye
tAnnibodha dvijottama |
nAyakA mama sainyasya
sanjnArthaM tAnbravImi te ||
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Meaning :
O best among the twice-born! For your kind attention and consideration, I will now tell you the names of those distinguished generals of my army, who are ready for the battle on our side.
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