Monday, March 24, 2014

आज का श्लोक, ’सूर्यसहस्रस्य’ / 'sUryasahasrasya'

आज का श्लोक, ’सूर्यसहस्रस्य’ / 'sUryasahasrasya'
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’सूर्यसहस्रस्य’ / 'sUryasahasrasya' - हज़ारों सूर्यों के,

अध्याय 11, श्लोक 12,
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दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता ।
यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः ॥
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(दिवि सूर्य-सहस्रस्य भवेत्-युगपत्-उत्थिता ।
यदि भाः सदृशी सा स्यात्-भासः तस्य महात्मनः ॥)
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भावार्थ :
आकाश में हजार सूर्य यदि एक साथ उदय हो उठें तो उनसे उत्पन्न होनेवाला प्रकाश भी कदाचित् ही उन महात्मा (श्रीकृष्ण) के उस प्रकाश के तुल्य हो ।
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’सूर्यसहस्रस्य’ / 'sUryasahasrasya' - a thousand Suns.

Chapter 11, shloka 12,
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divi sUryasahasrasya
bhavedyugapadutthitA |
yadi bhAH sadRushI sA syAd-
bhAsastasya mahAtmanaH ||
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Meaning :
Even if a thousand suns rise up and shine together in the sky, the radiance they would spread out, will be nothing in comparison to the splendor of this Great Being (kriShNa)
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