Monday, March 24, 2014

आज का श्लोक, ’सूर्यः’ / 'sUryaH',

आज का श्लोक, ’सूर्यः’ / 'sUryaH'
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’सूर्यः’ / 'sUryaH' - सूर्य,

अध्याय 15, श्लोक 8,
न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः ।
यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥
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(न तत्-भासयते सूर्यः न शशाङ्कः न पावकः ।
यत्-गत्वा न निवर्तन्ते तत्-धाम परमं मम ॥)
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भावार्थ :
मेरा वह परम धाम वह परम पद है, जिसे प्राप्त होकर मनुष्य संसार में लौटकर नहीं आते, जिसे न तो सूर्य प्रकाशित कर सकता है, न ही चन्द्र, और न अग्नि ।  
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’सूर्यः’ / 'sUryaH' -The Sun.

Chapter 15, shloka 6,
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na tadbhAsayate sUryo 
na shashAngko na pAvakaH |
yadgatvA na nivartante
taddhAma paramaM mama ||
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Meaning :
My abode, Where I ever abide, Which is illuminated by Me / My own Light, and not by the Sun or by the Moon, nor by the Fire. And Those Who attain That never return from There. (Never return to this life and existence of repeated births, rebirths and misery).
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