Friday, March 21, 2014

आज का श्लोक, ’सेवया’ / 'sewvayA',

आज का श्लोक, ’सेवया’ / 'sewvayA'
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’सेवया’ / 'sewvayA' - सेवा के द्वारा,

अध्याय  4, श्लोक 34,
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥
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(तत् विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानम् ज्ञानिनः तत्त्वदर्शिनः ॥)
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भावार्थ :
उस ब्रह्म (के तत्त्व) को जानने के लिए तत्त्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाओ, उन्हें विधिपूर्वक नमस्कार कर नम्रता से उनकी सेवा द्वारा उन्हें प्रसन्न कर सम्यक् रीति से प्रश्न करते हुए  उसे जानो । वे तुम्हें ज्ञान (की प्राप्ति के लिए) उचित उपदेश देंगे ।  


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’सेवया’ / 'sewvayA' - by means of serving them.
Chapter 4, shloka 34,
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tadviddhi praNipAtena
pariprashnena sewayA |
upadekShyanti te jnAnaM
jnAninastatvadarshinaH ||
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Meaning :
Know / grasp 'That' (Reality / Brahman) by means of serving them with due respect and honor, and questioning them properly about the Reality . And they, -those who have themselves Realized the same, will point out the way to This (Reality) for you,
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