Monday, March 3, 2014

आज का श्लोक, ’स्म’ / 'sma'

आज का श्लोक,  ’स्म’ / 'sma
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’स्म’ / 'sma' - निश्चय एवं अतीत-द्योतक अव्यय,
अध्याय 2 , श्लोक 3,
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क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
क्षुद्रं हृदय-दौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ  परंतप ॥
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(क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ न एतत् त्वयि उपपद्यते।
क्षुद्रं      हृदय-दौर्बल्यं      त्यक्त्वोत्तिष्ठ    परंतप ॥)
भावार्थ :
हे पार्थ (अर्जुन)! ऐसी भीरुता तुझे शोभा नहीं देती।  हृदय की इस क्षुद्र दुर्बलता को त्यागो और हे परंतप, उठ खड़े होओ !
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’स्म’ / 'sma' -  indeed, verily, expletive.
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Meaning :
O Arjun! O Man of Great penances, tormentor of enemies! Get rid of this weakness of heart, and stand up with firm determination.
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