Thursday, March 6, 2014

आज का श्लोक, ’सौम्यं’ / 'saumyaM',

आज का श्लोक,  ’सौम्यं’ / 'saumyaM',
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’सौम्यं’ / 'saumyaM', - सौम्य, मनोहारी,
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अध्याय 11, श्लोक 51,
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दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तव सौम्यं जनार्दन ।
इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः ॥
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(दृष्ट्वा- इदम् मानुषं रूपम् तव सौम्यं जनार्दन ।
इदानीम्-अस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः ॥)
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भावार्थ : हे जनार्दन! आपके इस सौम्य और मनोहारी मानव-रूप को देखने के बाद अब मैं पुनः अपने को अपनी स्वाभाविक अवस्था में और प्रसन्न अनुभव कर रहा हूँ ।
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’सौम्यं’ / 'saumyaM' - Gentle, amiable,
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Chapter 11, shloka 51,
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dRShTvedaM mAnuShaM rUpaM
tava saumyaM janArdana |
idAnImasmi saMvRttaH
sachetAH prakRtiM gataH ||
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Meaning :
arjuna said :
O janArdana (Lord shrikRShNa)! Seeing Your gentle, amiable human form, I am now calm and comfortable again.
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