Tuesday, March 18, 2014

आज का श्लोक, ’स्कन्दः’ / 'skandaH'

आज का श्लोक ’स्कन्दः’ / 'skandaH
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’स्कन्दः’ / 'skandaH' - षडानन, कार्तिकेय,

अध्याय 10, श्लोक 24,

पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम् ।
सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ॥
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(पुरोधसाम् च मुख्यम् माम् विद्धि पार्थ बृहस्पतिम् ।
सेनानीनाम् अहं स्कन्दः सरसाम् अस्मि सागरः ॥)
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हे पार्थ पुरोहितों में प्रधान, अर्थात् बृहस्पति मुझे ही जानो ।  सेनापतियों में स्कन्द तथा जलाशयों में सागर हूँ ।
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’स्कन्दः’ / 'skandaH' - kArtikeya, The six-faced son of shiva.
Chapter 10, shloka 24,

purodhasAM cha mukhyaM mAM
viddhi pArtha bRhaspatiM |
senAnInAM ahaM skandaH
sarasAmasmi sAgaraH ||
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Meaning :
O partha (arjuna)! Of priests, Know Me to be the chief, Lord bRhaspati. Of generals, I AM kartikeya, and of water-bodies I AM the ocean.
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