Thursday, March 27, 2014

आज का श्लोक, ’सुरगणाः’ / 'suragaNAH'

आज का श्लोक, ’सुरगणाः’ / 'suragaNAH'
______________________________

’सुरगणाः’ / 'suragaNAH

अध्याय 10, श्लोक 2,

न मे विदुः सुरगणाः प्रभवं न महर्षयः ।
अहं आदिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः ॥
--
(न मे विदुः सुरगणाः प्रभवम् न महर्षयः ।
अहम् आदिः हि देवानाम् महर्षीणाम् च सर्वशः ॥)
--
भावार्थ :
मेरी उत्पत्ति (आविर्भाव) को न तो सुरगण जानते हैं, और न ही कोई भी महर्षि । क्योंकि मैं ही सब प्रकार से देवताओं का तथा महर्षियों का भी आदि कारण हूँ ।  

--
’सुरगणाः’ / 'suragaNAH' - the various divine entities,

Chapter 10, shloka 2,
na me viduH suragaNAH
prabhavaM na maharShayaH |
ahamAdirhi devAnAM
maharShINAM cha sarvashaH ||
--
Neither the various celestial beings / divine entities, nor the great sages know My origin, because I AM the very origin of all those divine entities and the Great sages.
--

No comments:

Post a Comment