Saturday, August 30, 2014

आज का श्लोक, ’वित्तेशः’ / ’vitteśaḥ’

आज का श्लोक, ’वित्तेशः’ / ’vitteśaḥ’
____________________________

’वित्तेशः’ / ’vitteśaḥ’ - कुबेर, (कुब् / कुभ् आच्छादने - सम्पत्ति का संग्रह करनेवाला, प्रचुर धन का स्वामी, यक्षराज)

अध्याय 10, श्लोक 23,

रुद्राणां शङ्करश्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम् ।
वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम् ॥
--
(रुद्राणाम् शङ्करः च अस्मि वित्तेशः यक्षरक्षसाम् ।
वसूनाम् पावकः च अस्मि मेरुः शिखरिणाम् अहम् ।)
--
भावार्थ :
(ग्यारह) रुद्रों में मैं शंकर हूँ, यक्षों एवं राक्षसों में मैं धन का स्वामी कुबेर हूँ, (आठ) वसुओं में अग्नि हूँ, तथा शिखरवाले पर्वतों में सुमेरु पर्वत मैं हूँ ।
--
टिप्पणी :
इस अध्याय में परमात्मा की उन विभूतियों का वर्णन है, जिन्हें प्रत्यक्ष देखकर / जानकर परमात्मा की महिमा का यत्किञ्चित् अनुमान किया जा सकता है ।
--
’वित्तेशः’ / ’vitteśaḥ’ - kubera, (yakṣarāja, the lord of wealth, yakṣa-s)

Chapter 10, śloka 23,

rudrāṇāṃ śaṅkaraścāsmi
vitteśo yakṣarakṣasām |
vasūnāṃ pāvakaścāsmi
meruḥ śikhariṇāmaham ||
--
(rudrāṇām śaṅkaraḥ ca asmi
vitteśaḥ yakṣarakṣasām |
vasūnām pāvakaḥ ca asmi
meruḥ śikhariṇām aham |)
--
Meaning :
And, among (the eleven) rudra-s, I AM śaṅkara, kubera, The Lord of wealths among the yakṣa and the rakṣa. I AM The Fire, among the (eight) vasu-s, and meru (sumeru). among the mountains with peaks and summits.
--
Notes :
rudrā are the many forms of shiva / mahādeva, as described in veda and purāṇa.
yakṣa are the spiritual entities possessing occult powers.
rakṣa are the monstruous humans with great strength and full of desires and vigour.
vasu-s are the eight spiritual / celestial dignities that are Lords of, and look after eight directions.
--
दिक्- नयति, येन नीयते इति स दिग्नीतिः dik-nayati ,dik-nīyate yena iti sa dignītiḥ 
A dignity is one who spreads in all directions, ...
--


No comments:

Post a Comment