Wednesday, August 27, 2014

आज का श्लोक, ’विनियम्य’ / ’viniyamya’

आज का श्लोक,
’विनियम्य’ / ’viniyamya’
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’विनियम्य’ / ’viniyamya’  - संयमित करते हुए, संयम में रखते हुए,

अध्याय 6, श्लोक 24,

सङ्कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः ।
मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्ततः ॥
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(सङ्कल्पप्रभवान् कामान् त्यक्त्वा सर्वान् अशेषतः ।
मनसा-एव-इन्द्रियग्रामम् विनियम्य समन्ततः ॥)
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भावार्थ :
संकल्प से उत्पन्न होनेवाली सम्पूर्ण कामनाओं को निःशेष रूप से त्यागकर, मन के द्वारा इन्द्रियों के समुदाय को सभी विषयों की ओर जाने से भलीभाँति रोककर,  ...
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’विनियम्य’ / ’viniyamya’  - having well-restrained,

Chapter 6, śloka 24,

saṅkalpaprabhavānkāmāṃ-
styaktvā sarvānaśeṣataḥ |
manasaivendriyagrāmaṃ
viniyamya samantataḥ ||
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(saṅkalpaprabhavān kāmān
tyaktvā sarvān aśeṣataḥ |
manasā-eva-indriyagrāmam
viniyamya samantataḥ ||)
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Meaning :
Giving up completely all the desires born of thought, and with the help of mind (awareness),  controlling all the senses from going outward towards their objects, ...
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