Wednesday, September 17, 2014

5/16,

आज का श्लोक,
_________________________

अध्याय 5, श्लोक 16,

ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः ।
तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ॥
--
(ज्ञानेन तु यत् अज्ञानम् येषाम् नाशितम् आत्मनः ।
तेषाम् आदित्यवत् ज्ञानम् प्रकाशयति तत् परम् ॥)
--
भावार्थ :
जिन्होंने उस ज्ञान से अपनी आत्मा के अज्ञान को मिटा दिया है, सूर्य सा तेजस्वी वही ज्ञान उनके लिए परमेश्वर के तत्व को भी प्रकाशित कर देता है ।  
--
Chapter 5, śloka 16,

jñānena tu tadajñānaṃ
yeṣāṃ nāśitamātmanaḥ |
teṣāmādityavajjñānaṃ
prakāśayati tatparam ||
--
(jñānena tu yat ajñānam
yeṣām nāśitam ātmanaḥ |
teṣām ādityavat jñānam
prakāśayati tat param ||)
--
Meaning :
Those, who through that realization of the Self, have destroyed the ignorance of the Self, for them, the same realization shining like the Sun, also reveals the Supreme.
--

No comments:

Post a Comment