Friday, September 19, 2014

7/11,

आज का श्लोक,
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अध्याय 7, श्लोक 11,

बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम् ।
धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ ॥
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(बलम् बलवताम् च अहम् कामरागविवर्जितम् ।
धर्माविरुद्धः भूतेषु कामः अस्मि भरतर्षभ ॥ )
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भावार्थ :
बलवानों में कामना और आसक्तिरहित अर्थात् मदरहित बल मैं हूँ, हे भरतर्षभ (अर्जुन) ! सम्पूर्ण प्राणियों में प्रजनन का हेतु धर्म से अविरुद्ध अर्थात् धर्मसंगत काम मैं हूँ ।
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टिप्पणी :
यह श्लोक मनुष्य तथा जीवों की सहज नैसर्गिक प्रवृत्ति(यों) और सामाजिक दबावों के व्यक्ति एवं उसके व्यवहार पर पड़नेवाले प्रभाव के संबंध की ओर संक्षेप में किन्तु विस्तार और गहराई से प्रकाश डालता है ।
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Chapter 7, श्लोक 11,

balaṃ balavatāṃ cāhaṃ
kāmarāgavivarjitam |
dharmāviruddho bhūteṣu
kāmo:'smi bharatarṣabha ||
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(balam balavatām ca aham
kāmarāgavivarjitam |
dharmāviruddhaḥ bhūteṣu
kāmaḥ asmi bharatarṣabha || )
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Meaning :
I AM the strength of the mighty, devoid of desire and attachment. And O bharatarṣabha (arjuna) ! I AM the natural instinct of progeny in all the creatures.
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Note :
This śloka 11, speaks volumes about the human and animal behavior and the social impacts of the natural animal instincts of them, upon the individual.
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