Friday, September 19, 2014

7/15

आज का श्लोक,
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अध्याय 7, श्लोक 15,

न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः ।
माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः ॥
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(न माम् दुष्कृतिनः मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः ।
मायया अपहृत-ज्ञानाः आसुरम् भावम्-आश्रिताः ॥)
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भावार्थ :
नीच बुद्धि से युक्त, दुष्टकर्मों में संलग्न विवेकशून्य मनुष्य मेरी भक्ति (या चिन्तन भी) नहीं करते । क्योंकि माया से जिनकी बुद्धि नष्ट हो चुकी है ऐसे वे लोग आसुरी प्रवृत्ति वाले होते हैं ।
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Chapter 7, śloka 15,

na māṃ duṣkṛtino mūḍhāḥ
prapadyante narādhamāḥ |
māyayāpahṛtajñānā
āsuraṃ bhāvamāśritāḥ ||
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(na mām duṣkṛtinaḥ mūḍhāḥ
prapadyante narādhamāḥ |
māyayā apahṛta-jñānāḥ
āsuram bhābavam-āśritāḥ ||)
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Meaning :
The wicked, ignorant and those lacking conscience, attracted to do the evil, never come to Me nor think of  / follow Me. Because their mind is deluded by māyā and they have all such evil tendencies.
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