Monday, September 15, 2014

1/39,

आज का श्लोक,  1/39,
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अध्याय 1, श्लोक 39,

कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम् ।
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दनम् ॥
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कथम् न ज्ञेयम् अस्माभिः पापात् अस्मात् निवर्तितुम् ।
कुलक्षयकृतम् दोषम् प्रपश्यद्भिः जनार्दन ॥)
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भावार्थ :
किन्तु हे जनार्दन! कुल का क्षय करने से होनेवाले इस पाप को देखने में समर्थ, उसे अच्छी तरह जाननेवाले हम लोगों को क्या उससे निवृत्त होने (बचने) का उपाय नहीं करना चाहिए?  
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Chapter 1, śloka 39,

kathaṃ na jñeyamasmābhiḥ
pāpādasmānnivartitum |
kulakṣayakṛtaṃ doṣaṃ
prapaśyadbhirjanārdanam ||
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katham na jñeyam asmābhiḥ
pāpāt asmāt nivartitum |
kulakṣayakṛtam doṣam
prapaśyadbhiḥ janārdana ||)
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Meaning :
O janārdana! , (Though they don't see), we who know and see well the sin of destroying one's own family, should not desist from killing our own brethren?
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